(विजय पाल चतुर्वेदी)
डुमरियागंज/सिद्धार्थनगर – पथरा बाजार क्षेत्र के पेड़ार में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत श्रीमद् भागवत कथा व्यास आचार्य हरिवेन्द्र त्रिपाठी ने उद्धव ब्रजगमन की कथा सुना करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य ने कथा के माध्यम से स्पष्ट किया कि देवगुरु बृहस्पति के शिष्य उद्धव जिनको ज्ञान का गुमान था भगवान श्री कृष्ण उन्हें ब्रज भेज करके भक्ति का महत्व समझा दिए ।ग्वाल बाल और गोपियों के प्रेम और भक्ति के आगे उद्धव के ज्ञान की एक भी न चली और अंत में गोपियों ने उद्धव से कह दिया कि उद्धव तुम भये बौरे पाती लेके आए दौरे योग कौन जाने यहां रोम रोम श्याम हैं। और अंततः उद्धव ने भगवान से भक्ति ही मांगी। अतः व्यक्ति के जीवन में भक्ति की अत्यंत आवश्यकता है भक्ति विहीन ज्ञान होने से ज्ञानाभिमान का भय रहता है।कथा के क्रम में आगे आचार्य ने रुक्मणी विवाह मंगल की कथा और भगवान की अन्य विवाह की कथा सुनाएं भगवान श्री कृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ विवाह के महत्व को समझाते हुए आचार्य ने बताया कि पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश मन बुद्धि और अहंकार यह आठों प्रकृतियां भगवान की आठ पटरानी बन करके मानो दुनिया को संदेश दी हैं कि हम प्रकृतियां ईश्वर के बस में है और मनुष्य प्रकृतियों के बस में है। वेदों की सोलह हजार ॠचायें और सौ उपनिषद भगवान की रानी बना करके दुनिया को संदेश दिए हैं कि हम वेद और उपनिषद भी परमात्मा के वश में हैं रुक्मणी मंगल की कथा में श्रोता श्रद्धालु आनंद विभोर हो गए।


